रांची, 17 अक्टूबर 2025 — झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब एक अधिवक्ता ने न्यायाधीश को उनकी “सीमा में रहने” की नसीहत दे दी। यह घटना न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
घटना के बाद अदालत ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। हालांकि, न्यायाधीश द्वारा फाइल फेंकने की बात किसी विश्वसनीय रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हुई है।
⚖️ क्या हुआ अदालत में
मामला एक मुवक्किल के बिजली कनेक्शन बहाली से जुड़ा था। सुनवाई के दौरान जब न्यायमूर्ति कुमार ने अधिवक्ता तिवारी के बहस के तरीके पर आपत्ति जताई, तो तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा —
“मैं अपने तरीके से बहस करूंगा... किसी को अपमानित करने की कोशिश न करें... सीमा पार न करें।”
वायरल वीडियो में अधिवक्ता तिवारी को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है —
“देश न्यायपालिका की वजह से जल रहा है।”
🏛️ अदालत की प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद कोर्टरूम में माहौल गरम हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्य न्यायाधीश सहित पांच न्यायाधीशों की पीठ ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की है।
पीठ ने तिवारी को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
🤝 बार काउंसिल की प्रतिक्रिया
घटना के बाद झारखंड राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और कई वरिष्ठ वकीलों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत करने की कोशिश की।
अध्यक्ष ने इस प्रकरण को “सामान्य बहस का हिस्सा” बताया और कहा कि इसे अधिक तूल नहीं दिया जाना चाहिए।
🧩 तथ्य-जांच
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि न्यायाधीश द्वारा फाइल फेंकने का कोई विश्वसनीय प्रमाण या आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
पूरा विवाद मुख्यतः अधिवक्ता और न्यायाधीश के बीच हुई मौखिक नोकझोंक और उसके बाद की अवमानना कार्यवाही तक सीमित है।
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